Betul Street Light : 20 लाख का बिल बकाया, बिजली कंपनी ने काटा स्ट्रीट लाइट का कनेक्शन
घंटों अंधेरे में रहने के बाद कलेक्टर की फटकार पर किया शुरू, लोग हुए परेशान

Betul Street Light : बैतूल। नगर पालिका परिषद द्वारा बिजली कम्पनी के 20 लाख रुपए जमा नहीं किये जाने के चलते कम्पनी ने मंगलवार सारे शहर की स्ट्रीट लाइटें बन्द कर दी। बिजली कम्पनी की इस तानाशाही का असर भी आम लोगों को भुगतना पड़ा। सारा शहर जहां अंधेरे में डूबा रहा तो कई जगहों पर अंधेरा होने और मवेशियों के सड़क पर बैठे होने के कारण कई जगहों पर लोग दुर्घटना का शिकार भी हुए। सूत्रों से जानकारी मिली है। कि मामला कलेक्टर नरेंद्र सुर्यवंशी के पास पहुंचने के बाद उन्होंने जब कम्पनी के अधिकारियों की क्लास लगाई तब रात्रि 10 बजकर 5 मिनट पर स्ट्रीट लाइटें शुरू की गई। हालांकि इस तथ्य को अस्वीकार करते हुए बिजली कम्पनी के अधिकारी बिजली की शिकायतें ज्यादा होना वजह बता रहे हैं। लेकिन एक साथ एक ही वक्त में सारे शहर की स्ट्रीट लाइटें अचानक बन्द करना कहीं से कहीं तक हजम नहीं हो रहा।
दो दिन से लगातार हो रहा था ब्लेक आउट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका पर बिजली कम्पनी का करीब 20 लाख रूपए बकाया चल रहा था। इस राशि को जमा करवाने के लिए कई पत्राचार होने के बावजूद नपा ने राशि जमा नहीं करवाई थी। लिहाजा दो दिन पहले भी शहर के ज्यादातर हिस्सों की स्ट्रीट लाइट बन्द की गई थी। यही स्थिति मंगलवार भी देखने को मिली जब सारे शहर की स्ट्रीट लाईट जो शाम 6 बजे ही रोशन हो जाया करती हैं। वे रात्रि 10 बजे तक बन्द रही। शहर की सभी सड़कों के अलावा अंदरूनी हिस्से की सड़कें भी अंधेरे में डूबी रही। स्ट्रीट लाइटें बन्द किये जाने की भनक कलेक्टर नरेंद्र कुमार सुर्यवंशी तक पहुंच गई। जिसके बाद दोनों पक्षों को तलब कर उन्होंने वस्तुस्थिति से अवगत होने के बाद बिजली कम्पनी के अधिकारियों के इस रवैए पर नाराजगी जाहिर की और तत्काल स्ट्रीट लाइट रोशन किये जाने के निर्देश दिए।
कलेक्टर की फटकार के बाद कम्पनी के अधिकारियों ने मंगलवार रात 10 बजकर 5 मिनट पर शहर की स्ट्रीट लाईटें शुरू की। बिजली कम्पनी के जेई घनश्याम धुर्वे ने स्वीकार किया है कि कम्पनी को करीब 20 लाख रुपए की वसूली नगर पालिका से करना है।
मामला टालने के लिए शिकायतों का बनाया बहाना
इस मामले को लेकर जब बिजली कम्पनी के जेई धुर्वे से चर्चा की गई तो उन्होंने स्ट्रीट लाइटें बन्द किये जाने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइटें इसलिए बन्द की गई थी कि उपभोक्ताओं की शिकायते ज्यादा होने और इसका तत्काल निराकरण किया जाना जरूरी था इस वजह से स्ट्रीट लाइटें बन्द की गई थी। जबकि ऐसा कभी भी देखने मे नहीं आया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण करने के लिए स्ट्रीट लाइटें बन्द करनी पड़ी हो। वह भी एक साथ सारे शहर की।
सवा दो करोड़ लेने के बाद भी स्ट्रीट लाइट कर दी बन्द
बिजली कम्पनी द्वारा जिस तरह से स्ट्रीट लाइटों को बन्द किया गया आम जनता पर उसका विपरीत असर भी देखने को मिला। कई जगहों पर अंधेरी और गड्ढे नुमा सड़क पर लोग दुर्घटना का शिकार हुए। आम जनता के हितों को नजर अंदाज कर बिजली कम्पनी के इस कृत्य को कहीं से कहीं तक जनता के हित मे ठीक नहीं ठहराया जा सकता। वो भी तब जब बिजली कम्पनी को कुछ दिनों पूर्व ही नगर पालिका परिषद से करीब सवा दो करोड़ का भुगतान किया गया है। और काफी कम राशि बकाया होने के बाद वसूली के लिए आम जनता की सुविधाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ करते हुए स्ट्रीट लाइट की सप्लाई तक बंद कर दी गयी। नपा के अधिकारी भी बिजली कम्पनी के इस रवैये से अचंभित है।
उनका साफ कहना है कि इसी जुलाई माह में बिजली कम्पनी को करीब सवा दो करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। अब बिजली कम्पनी 20 लाख रूपए बकाया बता रही है। सवाल यह है कि जब नपा सवा दो करोड़ रुपए जमा कर सकती है तो बाकी बकाया राशि भी जमा की जा सकती है। बकाया वसूल करने के लिए स्ट्रीट लाइटें बन्द कर आम जन की सुविधाओं के साथ खिलवाड़ आखिर कैसे किया जा सकता है। भले ही बिजली कम्पनी के अधिकारी शिकायतों को आधार बनाकर स्ट्रीट लाइटें बन्द करने का बहाना बना रहे हों, लेकिन अधिकारियों को यह समझने की जरूरत है कि जनता को दी जाने वाली सुविधाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ सीधे सीधे मनमानी किये जाने की श्रेणी में नजर आ रहा है।
इनका कहना…
मुझे भी जानकारी मिली है कि कुछ बकाया रकम की वसूली को लेकर स्ट्रीट लाइटें बन्द की गई थी। इसी महीने नपा ने सवा दो करोड़ रुपए का भुगतान किया है। जो बकाया बताया जा रहा है उसमें भी संशय की स्थिति बन रही है। इसका निराकरण कम्पनी को करना चाहिए।
ओमपाल सिंह भदोरिया, मुख्य नगर पालिका अधिकारी नपा बैतूल




