Polics News: राजनीतिक हलचल: आखिर नारियल सम्मान के बाद खुश क्यों नहीं है कार्यकर्ता?? एक नेताजी का अभी न्यूटल न्यूट्रल कनेक्शन क्या है?? टीआई को लेकर कौनसे 2 नेताओं में मचा घमासान???? पढ़िए विस्तार से हमारे चर्चित कॉलम राजनितिक हलचल में…..
Polics News: Political stir: Why are the workers not happy after the coconut award?? What is the neutral neutral connection of a Netaji right now??

आखिर नारियल सम्मान से खुश क्यों नहीं कार्यकर्ता?
सत्तारूट पार्टी के एक मंडल ने पिछले दिनों देर आए दुरुस्त आए की तर्ज पर सम्मान कार्यक्रम आयोजित कर दूसरों को ऐसे आयोजन करने के लिए प्रेरित कर खूब सूर्खियां बटोरी। कार्यकर्ता भी इस सम्मान से गदगद नजर आए, लेकिन सम्मान के बाद यहां भी नाराजगी का गुबार फूट पड़ा। दरअसल मंडल के सम्मान समारोह के बाद एक कार्यकर्ताकी पीड़ा थी कि इस नारियल सम्मान के लिए उन्होंनेे जी तोड़ भलाई-बुराई तक ली, लेकिन हमारे जैसे छोटे कार्यकर्ताओं के कोई काम नहीं हो रहे। छोटे कार्यकर्ता की पीड़ा थी कि अधिकारी की तो छोड़ो, बाबू तक तवज्जों नहीं दे रहे हैं। ऐसे में नारियल सम्मान उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। कार्यकर्ता की यह पीड़ा यदि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी समझे तो इसके कई अर्थ निकाले जा सकते हैं। राजनीति में एक छोटे कार्यकर्ता की बात जमकर सूर्खियां बटोर रही है।
अभी न्यूटल, चुनाव के एक साल पहले होंगे सक्रिय
राजनीति भी क्या चीज है, यह बात अक्सर जुबान पर आते रहती है। इस बार भी एक विपक्षी पार्टी के पूर्व माननीय की सक्रियता इन दिनों न होने के कारण पार्टी के ही लोग दबी जुबान से सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की भूमिका में अपनी पार्टी की आवाज बुलंद नहीं करने से पूर्व माननीय के समर्थक भी हतप्रद होने के साथ उनसे दूर होते जा रहे हैं। उनके समर्थकों में चर्चा है कि पूर्व माननीय की मंशा है कि अभी विपक्षी की भूमिका में मेहनत करें और आखरी के एक वर्ष में टिकट लेकर आ ही जाएंगे। उनके समर्थक भी दबी जुबान से कह रहे हैं कि दूसरों को भी मुद्दें उठाने दिए जाए, जब वह थक जाएंगे, तब हमारे नेताजी मुद्दों को लीड करेंगे। इस बात में कितनी सच्चाई है, यह तो नेताजी और उनके समर्थक ही जाने, लेकिन उनके न्यूटल होने से समर्थक जरूर दूर होते जा रहे हैं।
टीआई को लेकर नेताओं में ठनी
एक क्षेत्र में टीआई को लेकर पार्टी के दो बड़े नेताओं में जमकर ठन गई है। चर्चा है कि एक चुने हुए एक बड़े जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के टीआई को रूखसत करना चाहते हैं, जबकि पंचायत के एक बड़े जनप्रतिनिधि टीआई को अपना करीबी बताकर अपने क्षेत्र में ही रखना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने बाद में पाला भी बदला, लेकिन यह सार्थक नहीं हो पाया। हालांकि टीआई को लेकर प्रतिष्ठा बना चुका दोनों बड़े नेता अपने स्तर पर जमकर लाबिंग कर रहे हैं। दोनों की नाराजगी भी सार्वजनिक हो चुकी है। मामला पार्टी हाईकमान तक भी पहुंचने की खबर है। ऐसे में टीआई बेचारे बलि का बकरा बनकर रह गया।
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