गंज मंडी कांप्लेक्स पर असमंजस की प्रेतछाया
ठेकेदार ने भुगतान न होने पर काम छोड़ा, अब नपा को करना पड़ेगा टेंडर रिकॉल

बैतूल। करीब 7 वर्ष पहले गंज सब्जी मंडी का जीर्णोंद्वार करते हुए नगरपालिका ने यहां पर मल्टी कांप्लेक्स बनाने की नींव रखी थी, यह अब तक धरातल पर नहीं उतरी है। इन सात वर्षों में असमंजस की ऐसी प्रेत छाया इस कांप्लेक्स पर पड़ी की कई अड़चने आई। नतीजा यह निकला कि इसके साथ के कई निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन कांप्लेक्स का निर्माण कब तक पूरा होगा। अभी भी दावे से नहीं कहा जा सकता है। इसी बीच एक और बुरी खबर आई है कि कांप्लेक्स बनाने वाले ठेकेदार ने भुगतान न होने और जीएसटी की राशि बढ़ने के बाद काम भी बीच से ही छोड़ दिया। नपा को अब टेंडर रीकाल करना पड़ेगा। इसके बाद ही काम शुरू होने की संभावना दिखाई दे रही है। इसमें भी लंबा समय लगने के आसार दिखाई दे रहे हैं।
वर्ष 2016-17 में नपा ने गंज में मल्टी कांप्लेक्स बनाने का प्लान तय किया था। तत्कालीन विधायक हेमंत खंडेलवाल के प्रयासों से नपा ने वर्ष 2016 में इसके लिए वर्क आर्डर भी जारी कर दिया। वर्ष 2017 में राजेंद्र सिंह किलेदार एंड कंपनी द्वारा खुदाई कर कांप्लेक्स निर्माण की शुरुआत की गई थी। कहा जा रहा है कि तीन पार्टनरों ने संयुक्त रूप से मिलकर यह बड़ा ठेका हासिल किया, लेकिन शुरू ही काम की रफ्तार काफी धीमी रही। निर्माण कार्य शुरू हुआ तो पहले फुटकर व्यापारी की नाराजगी नपा को झेलना पड़ा। यह मामला जनप्रतिनिधियों ने सुलझाया था कि वर्ष 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आ गई। इसके बाद विधायक बने पार्टी के निलय डागा ने इस कांप्लेक्स में परिवर्तन करवाया। छोटे-छोटे व्यापारियों की मांग पर प्रथम मंजिल पर भी दुकानें आवंटित करने के प्रयास शुरू हुए। तत्कालीन विधायक के निर्देश पर एक बार फिर कांप्लेक्स की ड्राइंग डिजाइन बदलने की कवायद शुरू हुई। इस बीच ठेकेदार को काम भी रोकना पड़ा।
भाजपा सरकार आई, फिर बदली ड्राइंग डिजाइन
वर्ष 2020 में लगभग डेढ़ वर्ष बाद प्रदेश में कमलनाथ की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई। इसके बाद एक बार फिर भाजपा के हाथों में कमान आई तो गंज कांप्लेक्स की ड्राइंग डिजाइन को बदला गया। ड्राइंग डिजाइन नागपुर से बनकर आई। इसके बाद यहां पर दोबारा 406 दुकानें बनाने का निर्णय लिया गया था। लगातार ड्राइंग डिजाइन बनने-बिगड़ने से ठेकेदार के काम में भी लगातार बाधा आई और निर्माण कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ।

लागत वहीं, जीएसटी न मिलने पर ठेकेदार ने काम छोड़ा
इस बीच करीब 11 करोड़ 40 लाख की लागत से 7 वर्षों में भी गंज कांप्लेक्स का काम महज 15 प्रतिशत ही पूरा हो पाया। लगातार ड्राइंग डिजाइन बदलने और राजनीति की भेंट चढ़ने के कारण 7 सालों में कांप्लेक्स निर्माण की लागत भी बढ़ती गई। सूत्र बताते हैं कि जीएसटी भी निर्माण कार्य की लागत से बढ़ता गया , लेकिन ठेकेदार को यह राशि भी नहीं मिली। 15 प्रतिशत काम पूरा करने पर भी पर्याप्त राशि भी नहीं दी गई। कहा जा रहा है कि ठेकेदार ने नपा जाकर चप्पले घिस दी, लेकिन उन्हें अब तक डेढ़ करोड़ रुपए का ही भुगतान हो पाया है। परेशान होकर ठेकेदार द्वारा हाल ही में कांप्लेक्स का काम छोड़ दिया है। ठेकेदार को करीब 40 लाख का नुकसान होने की बात भी सामने आई है।
दुकानदारों के नहीं फिरेंगे अभी दिन
छोटी दुकान चलाकर गंज मंडी में सैकड़ों दुकानदारों की रोजीरोटी चलती थी। उन्हें उम्मीद थी कि कांप्लेक्स बनने से उनके व्यवसाय में बढ़ोत्तरी होगी, लेकिन 7 वर्षों से न तो दुकान बन पाई। कई दुकानदार दूसरी जगह व्यवसाय कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मुनाफा नहीं हो रहा है। अब ठेकेदार द्वारा काम छोड़ने के कारण दुकानदारों के दिन कब फिरेंगे कहां नहीं जा सकता है। नई दुकानों के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इससे फुटकर व्यापारियों में नाराजगी के साथ आक्रोश भी पनप रहा है।
इनका कहना….
ठेकदार द्वारा गंज मंडी कांप्लेक्स का निर्माण कार्य बीच से छोड़े जाने की जानकारी मिली है। नपा शीघ्र ही बचे हुए कार्य के लिए टेंडर निकालकर काम शुरू कराएंगी।
ओमपाल सिंह भदौरिया, सीएमओ नपा बैतूल




