Betul DJ Ban : डीजे पर सख्ती के लिए वकीलों का भी ‘नो एंट्री’ प्लान!
जमानत लेने डीजे संचालकों की बढ़ेगी मुश्किलें, कॉलेज छात्रा की मौत के बाद बढ़ा आक्रोश,

Betul DJ Ban : बैतूल। डीजे के कानफोड़ू शोर के बीच एक कॉलेज छात्रा की मौत के बाद जिले में डीजे के बेतहाशा इस्तेमाल को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 डीजे संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। अब डीजे संचालकों की मुश्किलें और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं में भी इस मामले को लेकर नाराजगी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा जिन डीजे संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं, उनके मामलों में अधिवक्ताओं द्वारा पैरवी नहीं करने को लेकर जिला अभिभाषक संघ में चर्चा चल रही है।
संघ जल्द ही बैठक आयोजित कर इस संबंध में सामूहिक निर्णय ले सकता है। यदि निर्णय हुआ तो डीजे संचालकों को न्यायालय में अपने मामलों की पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध कराने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद डीजे और साउंड सिस्टम के निर्धारित नियमों का पालन नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन कराने और करवाने, दोनों स्तरों पर गंभीरता जरूरी है। सामाजिक दृष्टि से भी तमाम पाबंदियों के बावजूद डीजे साउंड का बेखौफ इस्तेमाल उचित नहीं है।
अशोक वर्मा ने कहा कि डीजे के शोर से जुड़ी इस घटना में एक बेटी को अपनी जान गंवानी पड़ी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि नियमों की अनदेखी इसी तरह जारी रही तो आम नागरिकों की जान की हिफाजत की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
उन्होंने बताया कि संघ के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं से चर्चा की जा रही है तथा बैठक में इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
डीजे संचालकों पर बढ़ सकती है मुश्किल
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद डीजे संचालकों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है। अब यदि जिला अभिभाषक संघ भी डीजे संचालकों के मामलों में पैरवी नहीं करने का निर्णय लेता है, तो यह कार्रवाई एक नए मोड़ पर पहुंच सकती है।
जानकारों का मानना है कि, प्रत्येक डीजे संचालक नियमों से भली भांति वाकिफ होता है। उसे पता है कि कोर्ट ने कितने डेसिबल के साउंड की मियाद तय कर रखी है, लेकिन निर्देशों की सड़कों पर सरेआम धज्जियां उड़ाना नैतिकता की श्रेणी में नहीं आता, लिहाजा डीजे के मामलों में अब सख्त से सख्त कार्यवाही की जरूरत है।




