Betul Van Vibhag : वन विभाग में अपनी डफली अपना राग, सागौन कटाई मामलों में कार्रवाई शून्य क्यों?
साल पहले दूसरे की बीट में कटवाया था सागौन, शिकायत के बाद हटाया और फिर बना दिया बीट इंचार्ज

Betul Van Vibhag : बैतूल। वन विभाग में इन दिनों अपनी डफली अपना राग वाली स्थिति बनी हुई है। जंगलों से सागौन के पेड़ों की कटाई के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसकी तस्दीक और कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठे नजर आ रहे हैं।सिर्फ खानापूर्ति हो रही है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन खबरों को इस बात से भी बल मिलता है कि, शाहपुर परिक्षेत्र कटाई के मामलों में हमेशा सुर्खियों में रहता है।
दूसरे की बीट से भी कटवा दिए गए सागौन
सूत्रों के अनुसार खोखरा पूर्व बीट में कटाई के जिस वन रक्षक पर आरोप लग रहे हैं, उसी वन रक्षक प्रमोद राजपूत पर आरोप है कि करीब एक वर्ष पहले उसने अपनी बीट छोडक़र दूसरी टेमरा बीट से सागौन का एक पेड़ कटवा दिया था। इतना ही नहीं, काटे गए पेड़ की लकड़ी से खेत में फर्नीचर भी बनवाया जा रहा था। जिस वन रक्षक की बीट से पेड़ काटा गया था, उसने फोटो और वीडियो सहित पूरे मामले की शिकायत अधिकारियों से की थी।
शिकायत सामने आने के बाद संबंधित वन रक्षक को बीट से हटा दिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ ही दिनों बाद उसे फिर से बीट इंचार्ज बना दिया गया। इससे सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि गंभीर आरोपों के बावजूद वन रक्षक को दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी गई? कहीं सागौन की कटाई के इस खेल में विभाग के अन्य जिम्मेदारों की भी मौन सहमति तो नहीं?
इधर, खोखरापूर्व बीट के कम्पार्टमेंट नंबर 234 में करीब 50 सागौन के पेड़ों की कटाई के आरोप सामने आये है। इसकी जानकारी एसडीओ उत्तम सिंह सस्त्या को दी गई थी। शुरुआत में उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए जानकारी लेने की बात कही थी। लेकिन बाद में मामले में क्या कार्रवाई हुई और कटाई की शिकायत में कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
उत्तर वन मण्डल के तेज तर्रार माने जाने वाले डीएफओ नवीन गर्ग ने भी फोन रिसीव नहीं किया, जिससे वन अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका।
अब सवाल यह है कि आखिर वन विभाग कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है? क्या जंगलों में सागौन कटता रहेगा और अधिकारी सिर्फ जानकारी लेने की बात कहते रहेंगे? लगातार सामने आ रहे मामलों और कार्रवाई के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मिलीभगत के आरोपों को भी खारिज करना काफी मुश्किल होगा।




