Politics: राजनीतिक हलचल: ऐसा क्या हुआ राजधानी में नेताओं की लगी क्लास, किसको लगी फटकार?? रैली दूसरे की, पैसा किसने लगाया, आखिर क्यों हो रही चर्चा??? कावड़ यात्रा में डीजल के डोज पर सियासत गर्म क्यों???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

राजधानी में लगी जिले के नेताओं की क्लास
विपक्षी पार्टी के प्रशिक्षण शिविर के बाद गाली-गलौज और धक्कामुक्की के विवाद में दोनों पक्षों पर दर्ज एफआईआर का मामला अब राजधानी तक पहुंच गया है। चर्चा है कि प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में जिले के दोनों प्रमुख थिंकटैंक को तलब किया। राजधानी में हुई बैठक में संगठन के भीतर बढ़ रही खींचतान को लेकर हाईकमान ने नाराजगी जताई।
चर्चाओं के मुताबिक एफआईआर की संस्कृति और पार्टी नेताओं के खिलाफ खबरें प्लांट करवाने के मुद्दे पर भी जमकर फटकार लगाई गई। नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया कि आपसी विवाद को सार्वजनिक करने से संगठन की छवि प्रभावित होती है। नेताओं को अपनी कार्यशैली और राजनीतिक सोच बदलने की नसीहत भी दिए जाने की चर्चा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि राजधानी से लौटने के बाद जिले की गुटीय राजनीति में कितना बदलाव आता है।
रैली में भीड़ भारी, खर्चा किसका?
शहर में विशेष दिवस पर समाज के हजारों लोगों की मौजूदगी में निकली रैली अब सियासी गलियारों में चर्चा का नया विषय बन गई है। जिस पार्टी के बैनर तले जिलेभर से लोगों को जुटाया गया, रैली की भव्यता देखकर खर्चे का आंकड़ा भी खूब उछल रहा है। राजनीतिक गलियारों में करीब 25 लाख रुपए खर्च होने की चर्चा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी रकम आई कहां से?
जिले में संबंधित पार्टी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इतना बड़ा खर्च अपने दम पर उठाना आसान नहीं माना जा रहा। ऐसे में चर्चा है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने वोट बैंक को साधने के लिए पर्दे के पीछे से सहयोग किया। कौन कितना मददगार बना, यह तो सामने नहीं आया, लेकिन रैली के बाद उठी चर्चाओं ने सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है। फिलहाल भीड़ की धवक में किसका साथ था, यह सवाल राजनीतिक गलियारों में खूब चटकारे ले रहा है।
कांवड़ यात्रा में डीजल का डोज, सियासत गरम
जिले के एक पवित्र क्षेत्र में सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष की कांवड़ यात्रा इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह यात्रा से ज्यादा उससे जुड़ा डीजल का ‘डोजÓ बताया जा रहा है। चर्चा है कि यात्रा के लिए डीजल की मांग को लेकर स्थानीय नगर पालिका सीएमओ से विवाद की स्थिति भी बनी। हालांकि पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में यह मुद्दा खूब तूल पकड़ रहा है।
दिलचस्प यह कि पार्टी के भीतर ही इसको लेकर कानाफूसी शुरू हो गई है और विपक्ष को भी बैठे-बिठाए सत्ताधारी दल को घेरने का मुद्दा मिल गया है। अब सवाल उठ रहा है कि धार्मिक यात्रा के लिए सरकारी संसाधनों की मांग हुई थी या मामला केवल आपसी गलतफहमी का था? फिलहाल डीजल की मांग से शुरू हुई चर्चा ने सियासी इंजन जरूर गर्म कर दिया है। आगे जांच में क्या निकला।
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