Chana Samarthan Mulya: चना समर्थन मूल्य खरीदी में बदल गए पिता

पंजीयन में पिता बाबूलाल, खसरे में बाबूराव
खरीदी में क्या नया फर्जीवाड़ा , सवालों के घेरे में पूरी प्रक्रिया
Chana Samarthan Mulya: बैतूल। जिले के भैंसदेही स्थित पूर्णा विपणन सहकारी समिति के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर चना खरीदी में कथित अनियमितताओं का एक और मामला सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि दस्तावेजों में स्पष्ट विसंगति होने के बावजूद किसान का पंजीयन किए जाने और उसके आधार पर समर्थन मूल्य पर चना खरीदी होने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्र बताते हैं कि,नए मामले में सामने आए तथ्यों के अनुसार किसान का पंजीयन ‘गुलाब पिता बाबूलालÓ के नाम से किया गया, जबकि पंजीयन के साथ संलग्न खसरे में वल्दियत बाबूरावÓ दर्ज है। दोनों दस्तावेजों में नाम अलग-अलग होने के बावजूद पंजीयन स्वीकृत कर लिया गया और खरीदी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्णा समिति में 3 मई को गुलाब पिता बाबूलाल के नाम से पंजीयन किया गया था। लेकिन पंजीयन के समर्थन में लगाए गए भूमि संबंधी दस्तावेज यानी खसरे में वल्दियत की जगह बाबूराव का नाम दर्ज बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पंजीयन के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया। यदि पंजीयन गिरदावरी और राजस्व अभिलेखों के आधार पर किया गया था, तो फिर नाम और वल्दियत में अंतर होने के बावजूद इसे मंजूरी कैसे मिल गई।
जांच हो तो बड़ा खुलासा और कई गड़बड़िया सामने आ सकती है।
पूर्णा विपणन सहकारी समिति भैंसदेही द्वारा 3 मई को रात्रि 8.34 बजे किसान गुलाब राठौर पिता बाबूलाल राठौर का समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना और सरसो बेचने पंजीयन किया गया। जिसका किसान कोड 222310011590 है।
इस पंजीयन में गुलाब राठौर की भैंसदेही स्थित खसरा नंबर 793/2/2 और 793/5 में गेहूं, चिल्कापुर स्थित खसरा नंबर 13/2 में चना और पोहर स्थित खसरा नंबर 208/3 और 208/2 में सरसो के लिए पंजीयन करवाया है। गुलाब राठौर के इसी पंजीयन में पटवारी हल्का नंबर 73 के खसरा नंबर 137/2 को भी जोड़ा गया है। जमीन प्रयाग पुत्र बाबूराव कुंबी, रंजना पति उमेश, अशोक कुंभारे पुत्र बाबूराव कुंभारे के नाम दर्ज है। इसके बावजूद उनकी भूमि में गेहूं बेचने पंजीयन कर दिया गया है।
फर्जीवाड़े की पहले भी हो चुकी एफआईआर
सूत्रों का दावा है कि समिति क्षेत्र में ऐसे कई पंजीयन हुए हैं, जिनमें दस्तावेजी विसंगतियों को नजरअंदाज कर लाभ दिलाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि समर्थन मूल्य खरीदी का लाभ दिलाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी समिति में फर्जी पंजीयन को लेकर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बावजूद प्रशासन की चुप्पी और जांच की धीमी गति पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है। मामले को लेकर जब समिति प्रबन्धक राजा जैन से वल्दियत में अंतर को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कम्प्यूटर आपरेटर को फोन पकड़ा दिया, लेकिन इसका जवाब आपरेटर भी नहीं दे पाए।
फिलहाल स्थानीय किसानो ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन को इस मामले में संज्ञान लेने की जरूरत इसलिए भी है कि इसके पूर्व भी भैसदेही में समर्थन मूल्य की खरीदी में फर्जीवाड़ा करने वालो के खिलाफ एफआईआर तक हो चुकी है।इसलिए भी जांच जरूरी है कि सच्चाई और भृम दोनो चीजें इसमें स्पस्ट होना चाहिए।




