Betul Samachar: जिले में 11.50 लाख किसान, महज 3.58 लाख किसानों की बनी फार्मर आईडी

नहीं मिलेगा किसानों को खाद, धरतीपुत्रों की बढ़ी परेशानी
Betul Samachar: बैतूल। जिले में किसानों के लिए फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है, जिससे आने वाले खरीफ सीजन में किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रशासन की सख्त व्यवस्था के तहत अब बिना फार्मर आईडी के किसानों को खाद के लिए टोकन नहीं दिया जाएगा, जिसके चलते लाखों किसान सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार बैतूल जिले में कुल लगभग 11.50 लाख किसान पंजीकृत हैं, जिनकी फार्मर आईडी बनाना अनिवार्य किया गया है, लेकिन अब तक केवल 3.58 लाख किसानों की ही आईडी बन पाई है, जबकि शेष बड़ी संख्या में किसान अभी भी इस प्रक्रिया से वंचित हैं। इस धीमी प्रगति के कारण प्रशासन और किसानों दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
फार्मर आईडी बनाने का कार्य विभिन्न स्तरों पर जारी तो है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत काफी धीमी बताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, तकनीकी समस्याएं और दस्तावेजों की जटिलता को भी इस देरी का कारण माना जा रहा है। कई किसान अभी भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आईडी नहीं बनने पर उन्हें खाद, बीज और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
बैतूल नगर सबसे पीछे
फार्मर आईडी बनाने के मामले में बैतूल नगर की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। यहां कुल 16,719 किसान दर्ज हैं, जिनमें से केवल 333 किसानों की ही फार्मर आईडी अब तक बन पाई है। इसका मतलब यह है कि लगभग 16,386 किसान अभी भी आईडी से वंचित हैं। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था की धीमी गति को भी दर्शाती है। वहीं मुलताई तहसील में किसानों की संख्या सबसे अधिक है। यहां लगभग 2,03,357 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 54,892 किसानों की ही फार्मर आईडी तैयार हो सकी है। बड़ी संख्या में बचे किसान अभी भी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
खाद वितरण पर सख्त नियम लागू
इस बार खरीफ सीजन के लिए प्रशासन ने खाद वितरण में टोकन सिस्टम लागू किया है। इसके तहत केवल उन्हीं किसानों को खाद के लिए टोकन दिया जाएगा जिनकी फार्मर आईडी बनी हुई है। जिन किसानों की आईडी नहीं बनेगी, उन्हें टोकन भी नहीं मिलेगा और वे खाद प्राप्त करने से वंचित रह सकते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना टोकन किसी भी किसान को खाद वितरित नहीं की जाएगी। इस नियम का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और वास्तविक किसानों तक सरकारी लाभ पहुंचाना बताया जा रहा है।
किसानों की बढ़ी परेशानी
नई व्यवस्था के कारण जिले के लाखों किसान चिंता में हैं। जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, उन्हें आशंका है कि वे समय पर खाद प्राप्त नहीं कर पाएंगे। इससे खेती की तैयारी और फसल उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही आईडी बनाने की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई तो खरीफ सीजन में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
वहीं प्रशासन की ओर से प्रयास जारी हैं कि अधिक से अधिक किसानों की आईडी जल्द से जल्द बनाई जा सके, ताकि खाद वितरण प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। कुल मिलाकर, फार्मर आईडी की धीमी प्रगति ने जिले के कृषि तंत्र पर दबाव बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया।
इनका कहना…
जिले में जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, उनके लिए अलग-अलग शिविर लगाएं जा रह है। सभी किसानों की आईडी बनकर तैयार हो इसके लिए प्रयास जारी है।
श्याम सिंह उईके,प्रभारी भू-अभिलेख विभाग, बैतूल
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