Betul News: युकां चुनाव में गुटबाजी की आहट, दो गुटों के कैंडिडेट्स की अलग-अलग सूची आई सामने

Betul News: There is a hint of factionalism in the Yuva Congress elections, two factions have come up with different lists of candidates

बड़ा सवाल जतन की ओर बढ़ रही कांग्रेस या पतन की ओर, मंच तक सीमित दिख रही एकता

Betul News: बैतूल। जिले की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सतह पर आ गई है। युकां के जिला स्तरीय चुनाव को लेकर दो अलग-अलग गुटों की सूचियों का लीक होना, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस का आपसी टकराव थमा नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी में भी जड़ें जमा चुका है। हालांकि इन दोनों सूचियों के सही होने की पुष्टि सांझवीर टाईम्स नहीं करता, लेकिन सूची यदि सही है। तो जिले में कांग्रेस के भविष्य का भगवान ही मालिक है?

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व ही पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने जिले में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर जिले के बड़े कांग्रेस नेताओं को गले मिलवाकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन पटवारी के पीठ फेरते ही जिला संगठन की जमीनी हकीकत अब कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि होना तो यह चाहिए था कि जिले भर के कांग्रेसी एकजुट होकर युंका के किए एक एक नाम तय कर लेते , लेकिन यहां फिर वहीं पुरानी कहानी दोहराई जा रही है, जो ठीक नहीं है।

सूचियों के ज़रिए गुटबाजी उजागर

दरअसल युकां के जिला चुनाव को लेकर अलग-अलग उम्मीदवारों की सूचियों के लीक होने से यह बात खुलकर सामने आ गई कि कांग्रेस में एकता केवल मंच तक सीमित है। सूत्रों के अनुसार यह सूचियां स्थानीय नहीं, बल्कि भोपाल से लीक हुई हैं। पहली सूची में संजय यादव को जिला अध्यक्ष, नंदिनी तिवारी को जिला महासचिव, प्रितेश गंगारे को विधानसभा अध्यक्ष और मनीष साहू को शहर ब्लॉक अध्यक्ष पद के लिए आगे किया गया है। वहीं दूसरी सूची में प्रदीप कोकाटे को जिला अध्यक्ष पद के लिए नामित किया गया है, जबकि दुर्योधन सोनी, चैतन्य, गौरव नंदनवार और रत्नेश देशमुख अन्य पदों के लिए दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। दिलचस्प है कि दोनों गुट प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए यश घनघोरिया का समर्थन कर रहे हैं, यानी गुटबाजी स्थानीय स्तर तक सीमित है, लेकिन इसके बावजूद इसके नतीजे प्रदेश की राजनीति तक असर डाल सकते हैं।

ऑनलाइन वोटिंग से बदल रहे समीकरण

बताया जा रहा है कि एक गुट अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए खुद ही सदस्यता शुल्क जमा करवा कर अपने समर्थकों को मेम्बर शिप दिलवाकर ऑनलाइन वोटिंग करवा रहा है ताकी चुनाव में उनका गुट शक्तिशाली बनकर उभर सके। यह नया तरीका गुटबाजी को और अधिक गहराई दे रहा है, जबकि चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन जिस प्रकार अंदरूनी खींचतान हो रही है, वह कांग्रेस की सांगठनिक कमजोरी को ही उजागर कर रहा है।

राहुल के संगठन सर्जन पर समन्वय नजरअंदाज

राहुल गांधी द्वारा चलाया जा रहा संगठन सर्जन अभियान देश भर में कांग्रेस को नये सिरे से खड़ा करने की कोशिश है। लेकिन अगर जिला स्तर पर ही कार्यकर्ता आपसी समन्वय न बना सकें, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि यह अभियान जतन की दिशा में जा रहा है या पतन की ओर? जब युंका जैसे संगठन में भी पारदर्शिता के बजाय लॉबिंग और गुटबाजी हावी हो, तो वरिष्ठ नेतृत्व की नीयत और निर्देश भी नाकाम होने जैसे ही प्रतीत हो रहे हैं।

कांग्रेस के भविष्य पर लग रहा प्रश्नचिन्ह

जिले की राजनीति पर पैनी नजर रखने वालों का मानना है कि कांग्रेस में एकता अब केवल सपना बनकर रह गई है। कई नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं संगठन के हितों से ऊपर नजर आ रही हैं। गुटों के बीच सत्ता की खींचतान इतनी तीव्र है कि अगर भगवान भी उतर आएं तो बैतूल में कांग्रेस को एकजुट नहीं कर सकते क्योंकि युंका के चुनाव में जिस गुट की जीत होगी। दूसरा गुट उसका खुला विरोध करेगा और अंतत: यही गुटबाजी एक बार फिर पार्टी को कमजोर करने का कारण बनेगी।

कुल मिलाकर युकां चुनाव के बहाने सामने आई गुटबाजी ने कांग्रेस की जमीनी स्थिति को उजागर कर दिया है। यह समय आत्ममंथन का है। अगर अब भी नेतृत्व सख्ती से हस्तक्षेप नहीं करता तो यह निश्चित है कि आने वाले चुनावों में कांग्रेस को फिर एक बार इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। संगठन का जतन तभी संभव है जब हर स्तर पर एकजुटता को प्राथमिकता दी जाए, वरना पतन की ओर बढ़ते कदम थमने वाले नहीं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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